International Research journal of Management Sociology & Humanities
( ISSN 2277 - 9809 (online) ISSN 2348 - 9359 (Print) ) New DOI : 10.32804/IRJMSH
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कलाविद् श्री द्वारका प्रसाद शर्मा ( दृश्य जगत की कला एवं उपलब्धियाँ )
1 Author(s): DR. KHEM SINGH DAGUR
Vol - 9, Issue- 1 , Page(s) : 498 - 500 (2018 ) DOI : https://doi.org/10.32804/IRJMSH
राजस्थानी कहावत है कि 'हाथी, हाथ, ऊंट और घोड़ा, बाकी सब चितरां में थोड़ा। इसका तात्पर्य यह है कि चित्रकला में हाथी, हाथ, ऊंट और घोड़े का अंकन करना कठिन काम है। पारंपरिक कला जगत में अभी भी यह धारणा हे कि जिस चित्रकार को यह चारों रूपांकन बनाने में महारत है, वह रेखांकन के क्षेत्र में सफल चितेरा है। इस सन्दर्भ में देखा जाए तो वयोवृद्ध चित्रकार द्वारका प्रसाद शर्मा के लिये घोड़े के विविध रूप-भंगिमाओं का चित्रण एक चुनौती नहीं, वरन् एक कौतुक है।