( ISSN 2277 - 9809 (online) ISSN 2348 - 9359 (Print) ) New DOI : 10.32804/IRJMSH

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सरकारी विद्यालयों में सरकारी शिक्षकों की भूमिका और मूल्यांकन।।

    1 Author(s):  PRAMOD KUMAR YADAV

Vol -  5, Issue- 7 ,         Page(s) : 63 - 66  (2014 ) DOI : https://doi.org/10.32804/IRJMSH

Abstract

विद्यालय बच्चों के सर्वांगीण विकास में सबसे अधिक सहायक है। विद्यालय ही एक ऐसा सषस्त माध्यम हैं जिसके द्वारा बच्चों को सामाजिक एवं व्यवहारिक बनाया जाता है। षिक्षा मानव जीवन का आधार स्तम्भ हैं। इसके अभाव में मानव जीवन के विकास की कल्पना ही नहीं की सकती है यह मानव जीवन की सर्वोत्कृश्ट एवं उच्चता का प्रतीक है। षिक्षा मानव के जीवन को सार्थक बनाती हैं। वर्तमान में षिक्षा जहाँ एक तरफ बालको का सर्वगीण विकास कर उन्हे बुद्धिमान विदवाण और चरित्रवाण बनाती है। वही दूसरों ओर यह मानव के विकाष हेतु भी एक अनिर्वाय एवं सक्तिषाली साधन है। ‘‘षिक्षा जिवन के तैयारी या नौ सिखियापन की अवस्था हैं।‘‘ बिलमोट की यह परिभाशा जनता में आज भी सामान्य रूप से प्रचलित धारणा से भिन्न नहीं है।

1. आरे0 के0 जोषी (2008) भारतीय शिक्षा व्यवस्था, किताब महल
2. एस0 पी0 गुप्ता (2012) भारत में शिक्षा व्यवस्था का विकास, षारदा पुस्तक भवन, इलाहाबाद।
3. एन0सी0एफ0 (2005) नई दिल्ली।
 

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