International Research journal of Management Sociology & Humanities
( ISSN 2277 - 9809 (online) ISSN 2348 - 9359 (Print) ) New DOI : 10.32804/IRJMSH
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स्वामी पराङ्कुशाचार्य की कृतियों का शिल्प.विधान
1 Author(s): SUBODH KUMAR SHANDILYA
Vol - 7, Issue- 11 , Page(s) : 158 - 172 (2016 ) DOI : https://doi.org/10.32804/IRJMSH
किसी भी रचना के दो पक्ष होते हैं. भाव पक्ष एवं कला पक्ष। रचना के उचित्त मूल्यांकन के लिए दोनों पक्षों का सम्यक अध्ययन आवश्यक है। भाव पक्ष के अंतर्गत् रचना में क्या कहा गया हैए इसका अध्ययन किया जाता हैए इसे कथ्य भी कहा जाता है। इस भाव पक्ष अथवा कथ्य को रचनाकार जिस तकनीकी का प्रयोग कर रूपायित करता हैए ष्शिल्पष् कहलाता है।