( ISSN 2277 - 9809 (online) ISSN 2348 - 9359 (Print) ) New DOI : 10.32804/IRJMSH

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हिन्दी काव्य में नारी का अस्तित्व

    1 Author(s):  HEMLATA

Vol -  9, Issue- 1 ,         Page(s) : 220 - 224  (2018 ) DOI : https://doi.org/10.32804/IRJMSH

Abstract

नारी ईश्वर की अनुपम देन है। किसी भी सभ्यता व संस्कृति के निर्माण तथा विकास में नारी का महत्वपूर्ण योगदान होता है। हिन्दी साहित्य के इतिहास से पता चलता है, कि भारत में नारी की पूजा की जाती थी’। ‘मनु स्मृति’ में नारी के संदर्भ में कहा गया है कि ’’यहाँँ स्त्रियाँ संतानोत्पत्ति जैसा बडा उपकार करने के कारण पूजा के योग्य और घरों की शोभा है। घरों में लक्ष्मी और स्त्री दोनों एक समान है इसमें कुछ अन्तर नहीं है। संतान जनना, जने हुए का पालन करना और नित्य का गृहकार्य इनका प्रत्यक्ष कारण स्त्री ही है।

1. कल्याण, पत्रिका मासिक, नारी अंक पृ.-114
2. अथर्ववेद, 9/2
3. महाभारत, सभापर्व,69/9
4. पी. वी. काणे, धर्मशास्त्र का इतिहास,पृ.-329
5. डाॅ. गजानन शर्मा, प्राचीन भारतीय इतिहास में नारी, पृ.-58
6. डाॅ. गजानन शर्मा, प्राचीन भारतीय इतिहास में नारी, पृ.-69
7. डाॅ. गजानन शर्मा, प्राचीन भारतीय इतिहास में नारी, पृ.-69
8. कल्याण, मासिक पत्रिका, नारी अंक पृ.-118
9. डाॅ. जयशंकर मिश्र, प्राचीन भारत का सामाजिक इतिहास, पृ.-407
10. श्री परशुराम चतुर्वेदी, बौö साहित्य की सांस्कृतिक झ्ालक, पृ. सं.-54
11. डाॅ. वल्लभदास तिवारी, हिन्दी काव्य में नारी, पृ. सं.-81
12. डाॅ. नगेन्द्र, हिन्दी साहित्य का इतिहास, पृ. सं.-163
13.हिन्दी साहित्य का संक्षिप्त इतिहास, बाबू गुलाबराय, संशोधक एवं संवर्धक, 
 प्रो. एन.वी.राजगोपाल, पृ. सं. -67
14. डाॅ. नगेन्द्र, हिन्दी साहित्य का इतिहास, 
15 तारापथ, सुमित्रानन्दन पंत, पृ. सं.-62

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