International Research journal of Management Sociology & Humanities
( ISSN 2277 - 9809 (online) ISSN 2348 - 9359 (Print) ) New DOI : 10.32804/IRJMSH
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लोकायत दर्शन का नीतिशास्त्र
1 Author(s): DR. SUJIT KUMAR
Vol - 8, Issue- 5 , Page(s) : 307 - 312 (2017 ) DOI : https://doi.org/10.32804/IRJMSH
भारत में चार्वाक दर्षन जीवित है अपने व्यावहारिक ;।चचसपमकद्ध दर्षन के कारण सर्वप्रथम मैं यह स्पश्ट कर दु की चार्वाक का चार्वाक दर्षन को लोकायत दर्षन भी कहते है। चार्वाक दर्षन ने विष्व-इतिहास में सबसे पहले लोकायत की बात की जब इसके ऋग्वेद रचयिता गुरू वृहस्पति ने अपने नौ सूत्रों के अंतिम नौवें सूत्र में कहा कि “ लौकिको मार्गोडनुसर्तव्यः’’ अर्थात सामान्य लोगों के मार्ग का अनुसरण करो।