International Research journal of Management Sociology & Humanities
( ISSN 2277 - 9809 (online) ISSN 2348 - 9359 (Print) ) New DOI : 10.32804/IRJMSH
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वैश्वीकरण और गाँधी जी
1 Author(s): DR. AJAY PAL SINGH
Vol - 7, Issue- 6 , Page(s) : 332 - 337 (2016 ) DOI : https://doi.org/10.32804/IRJMSH
वैश्वीकरण एक बहुआयामी अवधारणा है। इसके राजनैतिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक अवतार हैं। यह मान लेना उचित नही है कि वैश्वीकरण केवल आर्थिक परिघटना है। एक अवधारणा के रूप में इसकी बुनियादी बात है - प्रवाह। प्रवाह कई प्रकार के हो सकते हैं जैसे - विश्व के एक से ज्यादा क्षेत्रों के विचारों, पूंजी, श्रमशक्ति, तकनीकी तथा सांस्कृतिक तत्वों का अन्य क्षेत्रों में निर्बाध रूप से पहुँचना आदि। गाँधी जी के विचार (सिद्वान्त) - सत्य, स्वावलंबन, अहिंसा, स्वराज, सर्वोदय, अपरिग्रह आज वैश्वीकरण के युग में बहुत ही प्रासंगिक है।